“बटुए” को कहाँ मालूम

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“बटुए” को कहाँ मालूम
……पैसे उधार के हैं …
वो तो बस फूला ही रहता है
……अपने गुमान में …
…ठीक यही हाल हमारा है
साँसे उस प्रभु की उधार दी हुई है ।
……पर इंसान
ना जाने गुमान किस बात पर करता रहता है…..!!!!

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