इतिहास के पन्ने-‘पार्टी का कार्यकर्ता मैं हूँ, मेरा परिवार नहीं।

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एक बार भगतसिंह ने बातचीत करते हुए चन्द्रशेखर आज़ाद से कहा, ‘पंडित जी, हम क्रान्तिकारियों के जीवन-मरण का कोई ठिकाना नहीं, अत: आप अपने घर का पता दे दें ताकि यदि आपको कुछ हो जाए तो आपके परिवार की कुछ सहायता
की जा सके।’

चन्द्रशेखर सकते में आ गए और कहने लगे, ‘पार्टी का कार्यकर्ता मैं हूँ, मेरा परिवार नहीं। उनसे तुम्हें क्या मतलब? दूसरी बात -उन्हें तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं है और न ही मुझे जीवनी लिखवानी है। हम लोग नि:स्वार्थभाव से देश की सेवा में जुटे हैं, इसके एवज़ में न धन चाहिए और न ही ख्याति।

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चंद रिश्ते…जो मेरी उम्र भर की पूँजी है…

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💞चंद रिश्ते…जो मेरी उम्र भर की पूँजी है…

उन्ही रिश्तों में शामिल है… आपका भी नाम.
💖रिश्ते वो बड़े नहीं होते जो जन्म से जुड़े होते है !

रिश्ते वो बड़े होते है जो दिल❤ से जुडे होते है ! 💖
GOODWALA MORNINGJI

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इसलिए शायद पानी लकड़ी को कभी डूबने नहीं देता …

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छोटी मगर बहुत बड़ी बात

” पानी अपना पूरा जीवन देकर पेड़ को बड़ा करता हैं, इसलिए शायद पानी लकड़ी को कभी डूबने  नहीं देता।”
.
माँ- बाप का भी कुछ ऐसा ही सिद्धांत हैं।….

Goodwala Morningji

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मैं पैसा हूँ

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वाह रे पैसा! तेरे कितने नाम?

मंदिर मे दिया जाये तो ( चढ़ावा )

स्कुल में ( फ़ीस )

शादी में दो तो ( दहेज )

तलाक देने पर ( गुजारा भत्ता )

आप किसी को देते हो तो ( कर्ज )

अदालत में ( जुर्माना )

सरकार लेती है तो ( कर )

सेवानिवृत्त होने पे ( पेंशन )

अपहर्ताओ के लिएं ( फिरौती )

होटल में सेवा के लिए ( टिप )

बैंक से उधार लो तो ( ऋण )

श्रमिकों के लिए ( वेतन )

मातहत कर्मियों के लिए ( मजदूरी )

अवैध रूप से प्राप्त सेवा ( रिश्वत )

और मुझे दोगे तो (गिफ्ट)
मैं पैसा हूँ:!

मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते; मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ।

मैं पैसा हूँ:!

मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें।

मैं पैसा हूँ:!
मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते।

मैं पैसा हूँ:!

मैं नमक की तरह हूँ; जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है।

मैं पैसा हूँ:!

इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था; मगर फिरभी वो मरे और उनके लिए रोने वाला कोई नहीं था।

मैं पैसा हूँ:!

मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ; कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है।

मैं पैसा हूँ:!

मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ:! आपके पास नहीं हूँ तो; आपका नहीं हूँ:! मगर मैं आपके पास हूँ तो सब आपके हैं।

मैं पैसा हूँ:!

मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ; मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ देता हूँ।

मैं पैसा हूँ:!

मैं सारे फसाद की जड़ हूँ; मगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं:?।

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कहानी तीन बेस्ट दोस्तों की – ज्ञान , धन और विश्वास

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ज्ञान , धन और विश्वास
तीनों बहुत अच्छे दोस्त भी थे
तीनों में बहुत प्यार भी था

एक वक़्त आया जब तीनों को जुदा होना पड़ा तीनों ने एक दुसरे स सवाल किया कि हम कहाँ मिलेंगे

ञान ने कहा मैं मंदिर, विद्यालय मैं मिलूँगा

धन ने कहा मै अमीरों के पास मिलूँगा

विश्वास चुप था दोनों ने चुप होने की वजह पुछी तो विश्वास ने रोते हुवे कहा मैं एक बार चला ग़या तो फिर कभी नही मिलूँगा

शुभ प्रभातम, जय श्री कृष्णा 🌞🙏👏💐

🍂 Have a great day 🍂

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मुझे कहाँ मालूम था कि … सुख और उम्र की आपस में बनती नहीं…

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मुझे कहाँ मालूम था कि …
सुख और उम्र की आपस में बनती नहीं…
कड़ी महेनत के बाद सुख को घर ले आया…
तो उम्र नाराज होकर चली गई….
Goodwala Morningji
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अपने माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके

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अपने माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके
1. उनकी उपस्थिति में अपने फोन को दूर रखो.
2. वे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दो.
3. उनकी राय स्वीकारें.
4. उनकी बातचीत में सम्मिलित हों.
5. उन्हें सम्मान के साथ देखें.
6. हमेशा उनकी प्रशंसा करें.
7. उनको अच्छा समाचार जरूर बताएँ.
8. उनके साथ बुरा समाचार साझा करने से बचें.
9. उनके दोस्तों और प्रियजनों से अच्छी तरह से बोलें.
10. उनके द्वारा किये गए अच्छे काम सदैव याद रखें.
11. वे यदि एक ही कहानी दोहरायें तो भी ऐसे सुनें जैसे पहली बार सुन रहे हो.
12. अतीत की दर्दनाक यादों को मत दोहरायें.
13. उनकी उपस्थिति में कानाफ़ूसी न करें.
14. उनके साथ तमीज़ से बैठें.
15. उनके विचारों को न तो घटिया बताये न ही उनकी आलोचना करें.
16. उनकी बात काटने से बचें.
17. उनकी उम्र का सम्मान करें.
18. उनके आसपास उनके पोते/पोतियों को अनुशासित करने अथवा मारने से बचें.
19. उनकी सलाह और निर्देश स्वीकारें.
20. उनका नेतृत्व स्वीकार करें.
21. उनके साथ ऊँची आवाज़ में बात न करें.
22. उनके आगे अथवा सामने से न चलें.
23. उनसे पहले खाने से बचें.
24. उन्हें घूरें नहीं.
25. उन्हें तब भी गौरवान्वित प्रतीत करायें जब कि वे अपने को इसके लायक न समझें.
26. उनके सामने अपने पैर करके या उनकी ओर अपनी पीठ कर के बैठने से बचें.
27. न तो उनकी बुराई करें और न ही किसी अन्य द्वारा की गई उनकी बुराई का वर्णन करें.
28. उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में शामिल करें.
29. उनकी उपस्थिति में ऊबने या अपनी थकान का प्रदर्शन न करें.
30. उनकी गलतियों अथवा अनभिज्ञता पर हँसने से बचें.
31. कहने से पहले उनके काम करें.
32. नियमित रूप से उनके पास जायें.
33. उनके साथ वार्तालाप में अपने शब्दों को ध्यान से चुनें.
34. उन्हें उसी सम्बोधन से सम्मानित करें जो वे पसन्द करते हैं.
35. अपने किसी भी विषय की अपेक्षा उन्हें प्राथमिकता दें…!!!

माता – पिता इस दुनिया में सबसे बड़ा खज़ाना हैं..!! यह मेसेज हर घर तक पहुं�

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