Nobody is a friend or an enemy of other persons

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न कश्चित् कस्यचिन्मित्रं न कश्चित् कस्यचित् रिपुः।
अर्थतस्तु निबध्यन्ते मित्राणि रिपवस्तथा।।

न तो कोई किसी का मित्र होता है और न कोई शत्रु होता है। धन संपत्ति और व्यक्तिगत हित ही वे कारण होते हैं जो व्यक्तियों के बीच में मित्रता और शत्रुता स्थापित करते हैं।

Nobody is a friend or an enemy of other person/s. It is the wealth and motive to further one’s interests, which acts as a binding force between persons turning them into friends or enemies.

शुभ दिन हो।

🌸🌹💐 🙏🏼

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Money earned through deceptive/ sinful/ corrupt/unlawful means by an individual makes

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दीपो भक्षयते ध्वान्तं कज्जलं च प्रसूयते।
यदन्नं भक्ष्यते नित्यं जायते तादृशी प्रजा॥

जिस प्रकार दीपक अंधकार को समाप्त करता है अर्थात् खाकर कला धुआं/ काजल उत्पन्न करता है,
वैसे ही हम जिस प्रकार से उपार्जित अन्न ग्रहण करते हैं, हमारे विचार भी क्रमशः वैसे ही बन जाते हैं।

A lamp removes (eats) darkness and produces smoke side by side. Similarly money earned through deceptive/ sinful/ corrupt/unlawful means by an individual makes his mentality alike.

जैसा खाओ अन्न, वैसा होगा मन।

शुभ दिन हो।

🌹🌸💐🙏🏼

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कोई पुष्प रंग बिरंगा होने पर भी शोभित नहीं होता है (पसंद नहीं किया जाता है)

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कुसुमं वर्णसंपन्नं गन्धहीनं न शोभते।
न शोभते क्रियाहीनं मधुरं वचनं तथा।।

कोई पुष्प रंग बिरंगा होने पर भी शोभित नहीं होता है (पसंद नहीं किया जाता है) यदि वह गन्धहीन होता है। उसी प्रकार बिना कोई कार्य (सहायता) किये केवल मीठी मीठी बातें करना भी शोभा नहीं देता है।

A flower in spite of being very colourful is not adorned if it is not having fragrance. Similarly, only pleasant talk without any supporting action is not at all appreciated.

शुभ दिन हो।

🌸🌹💐🙏🏻

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Money follows Truth ..

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सत्यानुसारिणी लक्ष्मीः कीर्तिस्त्यागानुसारिणी।
अभ्याससारिणी विद्या बुद्धिः कर्मानुसारिणी॥

लक्ष्मी सत्य का अनुसरण करती हैं, कीर्ति त्याग का अनुसरण करती है, विद्या अभ्यास का अनुसरण करती है और बुद्धि कर्म का अनुसरण करती है॥

Money follows Truth,
Fame follows Renunciation, Knowledge follows Practice, and Intellect follows Actions.

शुभ दिन हो।

🌸🌹💐🙏🏼

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Only a person is our true friend who remains a friend even during …

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आपत्काले तु संप्राप्ते यन्मित्रं मित्रमेव तत्।
वृद्धिकाले तु संप्राप्ते दुर्जनोऽपि सुहृद्भवेत्।।

विपत्ति अथवा आपदा के समय भी जो व्यक्ति मित्र बना रहता है, वही एक सच्चा मित्र होता है अन्यथा जिस समय धन संपत्ति और ऐश्वर्य की वृद्धि हो रही होती है, उस समय तो दुष्ट और नीच व्यक्ति भी मित्र के समान व्यवहार करने लगते हैं।

Only a person is our true friend who remains a friend even during an emergency or a bad phase of our life. Otherwise, even mean and wicked persons behave like our friend during the period when our prosperity is on growth.

शुभ दिन हो।

🌸🌹💐🙏

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Auspicious and inauspicious events in the life of men occur

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केवलं ग्रह नक्षत्रं न करोति शुभाशुभं।
सर्वमात्रकृतं कर्मं लोकवादो ग्रहा इति।।

किसी व्यक्ति के जीवन में शुभ और अशुभ घटनाएँ उसके द्वारा किये हुए कर्मों से होती हैं और केवल ग्रहों और नक्षत्रों के प्रभाव से नहीं होती हैं।समाज में व्याप्त यह एक गलत धारणा मात्र है।

रामचरितमानस में भी गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है:

कादर मन कहुँ एक अधारा।
दैव दैव आलसी पुकारा।।

यह दैव तो कायर के मन का एक आधार (तसल्ली देने का उपाय) है। आलसी लोग ही दैव-दैव पुकारा करते हैं।

Auspicious and inauspicious events in the life of men occur due to their actions and not simply due to influence of planets and stars as is the wrong perception in the society.
We should not leave every thing to the fate but perform virtuous deeds in our life.

शुभ दिन हो।

🌻🌹💐🙏🏼

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