इतिहास के पन्ने-‘पार्टी का कार्यकर्ता मैं हूँ, मेरा परिवार नहीं।

Share to bring smiles

Share
Share

एक बार भगतसिंह ने बातचीत करते हुए चन्द्रशेखर आज़ाद से कहा, ‘पंडित जी, हम क्रान्तिकारियों के जीवन-मरण का कोई ठिकाना नहीं, अत: आप अपने घर का पता दे दें ताकि यदि आपको कुछ हो जाए तो आपके परिवार की कुछ सहायता
की जा सके।’

चन्द्रशेखर सकते में आ गए और कहने लगे, ‘पार्टी का कार्यकर्ता मैं हूँ, मेरा परिवार नहीं। उनसे तुम्हें क्या मतलब? दूसरी बात -उन्हें तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं है और न ही मुझे जीवनी लिखवानी है। हम लोग नि:स्वार्थभाव से देश की सेवा में जुटे हैं, इसके एवज़ में न धन चाहिए और न ही ख्याति।

Share

Some more interesting Post

See goodwala Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *